ईरान - अमेरिका समझौता विफल, शून्य परिणाम : जानें आगे क्या हुआ
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता विफल (failed) हो गई है। यह चर्चा 21 घंटे से अधिक समय तक चली।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस अपनी टीम के साथ अमेरिका के लिए रवाना हो चुके हैं। अमेरिका छोड़ने से पहले उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जहाँ उन्होंने कहा, "अमेरिका के साथ समझौता न करना ईरान के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की तुलना में बहुत बुरी खबर है। हम बिना किसी समझौते के अमेरिका वापस जा रहे हैं। हमने अपनी अंतिम सीमाओं (red lines) के बारे में जितना संभव हो सके उतना स्पष्ट कर दिया था, लेकिन उन्होंने हमारी शर्तों (terms) को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है।"
"किसी भी समझौते के लिए यह आवश्यक (necessary) है कि ईरान वादा करे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।"
इस बीच ईरान ने कहा कि इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ चर्चा बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई।
ईरानी समाचार एजेंसी के अनुसार, अमेरिका की शर्तें जरूरत से ज्यादा सख्त (strict) थीं, जिसके कारण समझौते के काम करने का कोई रास्ता नहीं था।
वार्ता का नेतृत्व करने वाली तालिका (Table leading the negotiations):
| अमेरिका (US) | ईरान (IRAN) |
| जे.डी. वेंस (उपराष्ट्रपति) | मोहम्मद बागेर कलीबाफ (संसद अध्यक्ष) |
| स्टीव विटकॉफ (विशेष दूत) | अब्बास अराघची (विदेश मंत्री) |
| जेरेड कुशनर (पूर्व राष्ट्रपति सलाहकार) | माजिद तख्त रवांची (उप विदेश मंत्री) |
| ब्रैड कूपर (CENTCOM कमांडर) | मोहम्मद बागेर जोल्घद्र (सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिव) |
पाकिस्तान (PAKISTAN):
शहबाज शरीफ (प्रधानमंत्री)
असीम मुनीर (थल सेना प्रमुख)
इशाक डार (विदेश मंत्री)
मोहम्मद असीम मलिक (राष्ट्रीय सुरक्षा)
वार्ता का पहला दौर दो घंटे का था और व्यक्तिगत रूप से (in person) हुआ था। उन्होंने लिखित में नोट्स बनाए। इस्लामाबाद में यह बैठक महत्वपूर्ण (significant) है क्योंकि 47 वर्षों में यह पहली बार है जब दोनों देशों के नेताओं ने उच्च-स्तरीय (high-level), आमने-सामने की बातचीत की है।
वार्ता की शुरुआत में ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि वह कुछ बिंदुओं पर बात करने पर विचार नहीं करेगा, क्योंकि यह उनका अधिकार है और उन्हें यह मिलना चाहिए। वे बिंदु हैं:
ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पूर्ण नियंत्रण होगा क्योंकि हमारे देश में रेलवे, गैस सुविधा, परमाणु सुविधा, विश्वविद्यालयों आदि को भारी नुकसान हुआ है और हमें इसका मुआवजा (compensation) मिलना चाहिए।
ईरान को युद्ध के लिए मुआवजा दिया जाना चाहिए।
अमेरिका द्वारा जब्त (frozen) की गई ईरान की संपत्ति बिना किसी सौदे के वापस की जानी चाहिए।
लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में लंबे समय तक चलने वाला युद्धविराम (ceasefire)।
बातचीत के लिए आगे बढ़ने के बावजूद, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो युद्धपोत भेजे। सेंट्रल यू.एस. कमांड (CENTCOM) ने कहा कि 11 अप्रैल से उन्होंने उन समुद्री बारूदी सुरंगों (marine mines) को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जो होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई थीं। दो अमेरिकी युद्धपोतों - USS FRANKE E. PETERSON (DDG 121) और USS MICHAEL MURPHY (DDG 112) - ने इस ऑपरेशन का नेतृत्व किया।
CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, "आज हमने एक नया सुरक्षित रास्ता बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हम बहुत जल्द समुद्री व्यापारियों को सुरक्षित रास्तों के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे, ताकि व्यापार बिना किसी बाधा (obstacles) के जारी रह सके।"
इस बात की जानकारी होने के बाद, ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी कि यदि उनके युद्धपोत 30 मिनट के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य से नहीं निकले, तो वे मिसाइलों से हमला करेंगे।
इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने कहा, "वे ईरान पर हमला करने के लिए तैयार हैं। ईरान के खिलाफ अभियान (campaign) खत्म नहीं हुआ है - हमें अभी और भी बहुत कुछ करना है।"
अल जजीरा की रिपोर्टों के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका ने सद्भावना (goodwill) के तौर पर ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने पर विचार किया है, जिसे ईरान के लिए एक छोटी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि ये वार्ता विफल होती है, तो इसकी जिम्मेदारी (responsibility) अमेरिका और इजरायल दोनों की होगी। इन वार्ताओं के बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि शांति समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका फिर से हमला करेगा।
बातचीत के दौरान हम किसी विजेता को तय नहीं कर सकते लेकिन जो स्पष्ट है वह यह है कि कोई परिणाम (outcome) नहीं निकला है। क्या युद्ध जारी रहेगा? क्या युद्धविराम आगे बढ़ेगा? ऐसे कई सवाल अनुत्तरित (unanswered) रह गए हैं। यह विफल वार्ता वैश्विक स्तर पर एक बड़ा झटका है।
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